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ramayan 4.11.53: जिसने रक्त छिड़ककर इस मेरे निवासस्थान वन को अपवित्र किया है, वह आज से इस वन में प्रवेश न करे। यदि वह इसमें प्रवेश करेगा, तो मारा जाएगा॥ 53॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  4.11.53 
इह तेनाप्रवेष्टव्यं प्रविष्टस्य वधो भवेत्।
वनं मत्संश्रयं येन दूषितं रुधिरस्रवै:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जिसने रक्त छिड़ककर इस मेरे निवासस्थान वन को अपवित्र किया है, वह आज से इस वन में प्रवेश न करे। यदि वह इसमें प्रवेश करेगा, तो मारा जाएगा॥ 53॥
 
'The one who has defiled this forest, my abode, by sprinkling blood, should not enter this forest from today. If he enters it, he will be killed.॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)