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ramayan 4.11.52: उन्होंने अपनी आध्यात्मिक शक्तियों से जान लिया कि यह काम बंदर का है, अतः उन्होंने उस बंदर को शाप दे दिया जिसने शव फेंका था॥ 52॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  4.11.52 
स तु विज्ञाय तपसा वानरेण कृतं हि तत्।
उत्ससर्ज महाशापं क्षेप्तारं वानरं प्रति॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपनी आध्यात्मिक शक्तियों से जान लिया कि यह काम बंदर का है, अतः उन्होंने उस बंदर को शाप दे दिया जिसने शव फेंका था॥ 52॥
 
‘He realised through his spiritual powers that this was the handiwork of a monkey. So he cursed the monkey who had thrown the corpse.॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)