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ramayan 4.11.51: यह कहकर ऋषि मातंगे बाहर गए और चारों ओर देखा तो उन्हें एक पर्वताकार भैंसा जमीन पर मृत पड़ा दिखाई दिया।   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  4.11.51 
इत्युक्त्वा स विनिष्क्रम्य ददृशे मुनिसत्तम:।
महिषं पर्वताकारं गतासुं पतितं भुवि॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर ऋषि मातंगे बाहर गए और चारों ओर देखा तो उन्हें एक पर्वताकार भैंसा जमीन पर मृत पड़ा दिखाई दिया।
 
Having said this the sage Matange went out and looked around. He saw a mountain-sized buffalo lying lifeless on the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)