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ramayan 4.11.49: हे महामुनि! वहाँ पड़े हुए रक्त की बूंदों को देखकर मतंगे ऋषि क्रोधित हो गए और सोचने लगे कि 'यह कौन है जिसने यहाँ रक्त छिड़का है?'॥49॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  4.11.49 
तान् दृष्ट्वा पतितांस्तत्र मुनि: शोणितविप्रुष:।
क्रुद्धस्तस्य महाभाग चिन्तयामास को न्वयम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! वहाँ पड़े हुए रक्त की बूंदों को देखकर मतंगे ऋषि क्रोधित हो गए और सोचने लगे कि 'यह कौन है जिसने यहाँ रक्त छिड़का है?'॥49॥
 
O great one! Seeing those drops of blood lying there the sage Matange became infuriated and started thinking, 'Who is this who has spattered blood here?॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)