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ramayan 4.11.45: 'दोनों में भयंकर युद्ध छिड़ गया। उस समय वालि ने दुंदुभि को उठाकर भूमि पर पटक दिया और उसे अपने शरीर से दबा भी दिया, जिससे दुंदुभि चूर-चूर हो गई।   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  4.11.45 
तं तु दुन्दुभिमुद्यम्य धरण्यामभ्यपातयत्।
युद्धे प्राणहरे तस्मिन्निष्पिष्टो दुन्दुभिस्तदा॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
'दोनों में भयंकर युद्ध छिड़ गया। उस समय वालि ने दुंदुभि को उठाकर भूमि पर पटक दिया और उसे अपने शरीर से दबा भी दिया, जिससे दुंदुभि चूर-चूर हो गई।
 
‘A deadly battle broke out between the two. At that time Vaali picked up the Dundubhi and threw it on the ground, and also pressed it with her body, due to which the Dundubhi got crushed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)