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ramayan 4.11.43: उस समय इन्द्र के समान शक्तिशाली दुन्दुभिपर ने घूँसों, लातों, घुटनों, शिलाओं और वृक्षों से आक्रमण करना आरम्भ कर दिया।   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  4.11.43 
अयुध्यत तदा वाली शक्रतुल्यपराक्रम:।
मुष्टिभिर्जानुभि: पद्भि: शिलाभि: पादपैस्तथा॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उस समय इन्द्र के समान शक्तिशाली दुन्दुभिपर ने घूँसों, लातों, घुटनों, शिलाओं और वृक्षों से आक्रमण करना आरम्भ कर दिया।
 
‘At that time Dundubhipar, who was as powerful as Indra, began attacking with punches, kicks, knees, rocks and trees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)