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ramayan 4.11.40: महाकपि-पुरुष ने पर्वताकार दुन्दुभि के दोनों सींग पकड़ लिये और जोर से गर्जना करते हुए उसे बार-बार घुमाया।   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  4.11.40 
विषाणयोर्गृहीत्वा तं दुन्दुभिं गिरिसंनिभम्।
आविध्यत तथा वाली विनदन् कपिकुञ्जर:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
महाकपि-पुरुष ने पर्वताकार दुन्दुभि के दोनों सींग पकड़ लिये और जोर से गर्जना करते हुए उसे बार-बार घुमाया।
 
The great ape-man held both the horns of the mountain-sized Dundubhi and rotated it again and again while roaring loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)