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ramayan 4.11.39: ऐसा कहकर क्रोधित वालि ने अपने पिता इन्द्र द्वारा दी गई विजयप्रद स्वर्ण माला अपने गले में डाल ली और युद्ध के लिए खड़ा हो गया।   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  4.11.39 
तमेवमुक्त्वा संक्रुद्धो मालामुत्क्षिप्य काञ्चनीम्।
पित्रा दत्तां महेन्द्रेण युद्धाय व्यवतिष्ठत॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर क्रोधित वालि ने अपने पिता इन्द्र द्वारा दी गई विजयप्रद स्वर्ण माला अपने गले में डाल ली और युद्ध के लिए खड़ा हो गया।
 
Having said this to him, the angry Vali put around his neck the victory-giving golden garland given to him by his father Indra and stood up for the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)