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ramayan 4.11.37: यह सुनकर वालि ने मन्द स्वर में मुस्कुराकर तारा आदि समस्त स्त्रियों को दूर धकेल दिया और राक्षसराज से क्रोधित होकर बोला-॥37॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  4.11.37 
स प्रहस्याब्रवीन्मन्दं क्रोधात् तमसुरेश्वरम्।
विसृज्य ता: स्त्रिय: सर्वास्ताराप्रभृतिकास्तदा॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर वालि ने मन्द स्वर में मुस्कुराकर तारा आदि समस्त स्त्रियों को दूर धकेल दिया और राक्षसराज से क्रोधित होकर बोला-॥37॥
 
Hearing this, Vali smiled softly and pushed away all the women like Tara and spoke angrily to the demon king -॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)