Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.11.33: "या बन्दर! मैं आज रात को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखूँगा। तुम सूर्योदय तक मुझसे समय ले सकते हो और इच्छानुसार यौन सुख भोग सकते हो।"   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  4.11.33 
अथवा धारयिष्यामि क्रोधमद्य निशामिमाम्।
गृह्यतामुदय: स्वैरं कामभोगेषु वानर॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
"या बन्दर! मैं आज रात को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखूँगा। तुम सूर्योदय तक मुझसे समय ले सकते हो और इच्छानुसार यौन सुख भोग सकते हो।"
 
"Or monkey! I will restrain my anger tonight. You can take time from me till sunrise to enjoy your sexual pleasures as per your wish. 33.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)