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ramayan 4.11.30: "हे महाबली दुन्दुभे! मैं तुम्हें भली-भाँति जानता हूँ। तुम इस नगर के द्वार को रोककर क्यों गर्जना कर रहे हो? अपने प्राण बचाओ।" ॥30॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.11.30 
किमर्थं नगरद्वारमिदं रुद्‍ध्वा विनर्दसे।
दुन्दुभे विदितो मेऽसि रक्ष प्राणान् महाबल॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
"हे महाबली दुन्दुभे! मैं तुम्हें भली-भाँति जानता हूँ। तुम इस नगर के द्वार को रोककर क्यों गर्जना कर रहे हो? अपने प्राण बचाओ।" ॥30॥
 
"O mighty Dundubhe! I know you very well. Why are you roaring, blocking this city gate? Save your life." ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)