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ramayan 4.11.3: परन्तु वालिका में जो भी प्रयत्न, शक्ति और धैर्य हो, उसे ध्यानपूर्वक सुनो। तत्पश्चात् जैसा उचित समझो वैसा करो॥3॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.11.3 
वालिन: पौरुषं यत्तद् यच्च वीर्यं धृतिश्च या।
तन्ममैकमना: श्रुत्वा विधत्स्व यदनन्तरम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
परन्तु वालिका में जो भी प्रयत्न, शक्ति और धैर्य हो, उसे ध्यानपूर्वक सुनो। तत्पश्चात् जैसा उचित समझो वैसा करो॥3॥
 
‘But whatever effort, strength and patience Valika has, listen to it all with full attention. After that do as you deem fit.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)