Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.11.28: उस समय वालि अन्तःपुर में था। उस राक्षस की गर्जना सुनकर वह क्रोधित हो उठा और स्त्रियों से घिरा हुआ नगर से बाहर निकल आया, जैसे चन्द्रमा तारों से घिरा हुआ हो॥ 28॥ | ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्त:पुरगतो वाली श्रुत्वा शब्दममर्षण:।
निष्पपात सह स्त्रीभिस्ताराभिरिव चन्द्रमा॥ २८॥
अनुवाद
उस समय वालि अन्तःपुर में था। उस राक्षस की गर्जना सुनकर वह क्रोधित हो उठा और स्त्रियों से घिरा हुआ नगर से बाहर निकल आया, जैसे चन्द्रमा तारों से घिरा हुआ हो॥ 28॥
‘Vaali was in the inner chamber at that time. On hearing the roar of that demon he became furious and came out of the city surrounded by women like the moon surrounded by stars.॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥