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ramayan 4.11.26: वह महापराक्रमी दुन्दुभि किष्किन्धापुरी के द्वार पर आकर पृथ्वी को कम्पित करने वाला ऐसा घोर गर्जना करने लगा, मानो दुन्दुभि घोर शब्द कर रहा हो ॥26॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.11.26 
ततस्तु द्वारमागम्य किष्किन्धाया महाबल:।
ननर्द कम्पयन् भूमिं दुन्दुभिर्दुन्दुभिर्यथा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वह महापराक्रमी दुन्दुभि किष्किन्धापुरी के द्वार पर आकर पृथ्वी को कम्पित करने वाला ऐसा घोर गर्जना करने लगा, मानो दुन्दुभि घोर शब्द कर रहा हो ॥26॥
 
‘That great mighty Dundubhi came to the gate of Kishkindhapuri and started roaring loudly, making the earth tremble, as if Dundubhi was making a loud noise. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)