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ramayan 4.11.24: हिमवान् के वचन सुनकर दुन्दुभि क्रोध में भरकर तुरन्त ही वालि की किष्किन्धा नगरी में पहुँचा॥ 24॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.11.24 
श्रुत्वा हिमवतो वाक्यं कोपाविष्ट: स दुन्दुभि:।
जगाम तां पुरीं तस्य किष्किन्धां वालिनस्तदा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हिमवान् के वचन सुनकर दुन्दुभि क्रोध में भरकर तुरन्त ही वालि की किष्किन्धा नगरी में पहुँचा॥ 24॥
 
On hearing Himavan's words, Dundubhi filled with anger immediately reached Vali's Kishkinda city.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)