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ramayan 4.11.20: यह सुनकर, वार्तालाप में निपुण पुण्यात्मा हिमवान ने उस महान् राक्षस से, जिसके विरुद्ध पहले किसी ने कोई योद्धा नहीं बताया था, क्रोधित होकर कहा:   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.11.20 
हिमवानब्रवीद् वाक्यं श्रुत्वा वाक्यविशारद:।
अनुक्तपूर्वं धर्मात्मा क्रोधात् तमसुरोत्तमम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर, वार्तालाप में निपुण पुण्यात्मा हिमवान ने उस महान् राक्षस से, जिसके विरुद्ध पहले किसी ने कोई योद्धा नहीं बताया था, क्रोधित होकर कहा:
 
Hearing this, the virtuous Himavan, skilled in conversation, angrily said to the great demon, for whom no one had previously named a rival warrior:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)