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ramayan 4.11.2: प्रभु! आपके बाण प्रज्वलित, तीक्ष्ण और भेदने वाले हैं। यदि आप क्रोधित हो जाएँ, तो इनसे प्रलयकाल के सूर्य के समान सम्पूर्ण लोकों का नाश कर सकते हैं। इसमें संशय नहीं है॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.11.2 
असंशयं प्रज्वलितैस्तीक्ष्णैर्मर्मातिगै: शरै:।
त्वं दहे: कुपितो लोकान् युगान्त इव भास्कर:॥ २॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! आपके बाण प्रज्वलित, तीक्ष्ण और भेदने वाले हैं। यदि आप क्रोधित हो जाएँ, तो इनसे प्रलयकाल के सूर्य के समान सम्पूर्ण लोकों का नाश कर सकते हैं। इसमें संशय नहीं है॥ 2॥
 
‘Prabhu! Your arrows are blazing, sharp and penetrating. If you become angry, then with these you can destroy all the worlds like the sun at the time of doomsday. There is no doubt about this.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)