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ramayan 4.11.18: बुद्धिमान गिरिराज हिमालय के ये वचन सुनकर दुन्दुभि के नेत्र क्रोध से लाल हो गए और वह इस प्रकार बोला- ॥18॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.11.18 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा गिरिराजस्य धीमत:।
उवाच दुन्दुभिर्वाक्यं क्रोधात् संरक्तलोचन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान गिरिराज हिमालय के ये वचन सुनकर दुन्दुभि के नेत्र क्रोध से लाल हो गए और वह इस प्रकार बोला- ॥18॥
 
Hearing these words of wise Giriraj Himalaya, Dundubhi's eyes turned red with anger and he said thus - 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)