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ramayan 4.11.16: तब श्वेत मेघ के समान सौम्य स्वभाव वाले हिमवान वहाँ प्रकट हुए। उनकी आकृति सुख देने वाली थी। वे अपने शिखर पर खड़े होकर बोले - 16॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.11.16 
तत: श्वेताम्बुदाकार: सौम्य: प्रीतिकराकृति:।
हिमवानब्रवीद् वाक्यं स्व एव शिखरे स्थित:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तब श्वेत मेघ के समान सौम्य स्वभाव वाले हिमवान वहाँ प्रकट हुए। उनकी आकृति सुख देने वाली थी। वे अपने शिखर पर खड़े होकर बोले - 16॥
 
Then the gentle natured Himavaan, shaped like a white cloud, appeared there. Her figure was a source of happiness. Standing on his own peak he said – 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)