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ramayan 4.11.12-13: जो विशाल वन पर्वतों का राजा और भगवान शंकर का ससुर है, तपस्वियों का सबसे बड़ा आश्रय है और जो संसार में हिमवान नाम से प्रसिद्ध है, जहाँ से जल के बड़े-बड़े स्रोत प्रकट हुए हैं और जहाँ अनेक गुफाएँ और झरने हैं, वही गिरिराज हिमालय तुम्हारे साथ युद्ध करने में समर्थ है और तुम्हें अतुलनीय प्रेम दे सकता है॥12-13॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  4.11.12-13 
शैलराजो महारण्ये तपस्विशरणं परम्।
शंकरश्वशुरो नाम्ना हिमवानिति विश्रुत:॥ १२॥
महाप्रस्रवणोपेतो बहुकन्दरनिर्झर:।
स समर्थस्तव प्रीतिमतुलां कर्तुमर्हति॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जो विशाल वन पर्वतों का राजा और भगवान शंकर का ससुर है, तपस्वियों का सबसे बड़ा आश्रय है और जो संसार में हिमवान नाम से प्रसिद्ध है, जहाँ से जल के बड़े-बड़े स्रोत प्रकट हुए हैं और जहाँ अनेक गुफाएँ और झरने हैं, वही गिरिराज हिमालय तुम्हारे साथ युद्ध करने में समर्थ है और तुम्हें अतुलनीय प्रेम दे सकता है॥12-13॥
 
The vast forest which is the king of mountains and the father-in-law of Lord Shankar, the biggest refuge of ascetics and is famous in the world by the name Himavan, from where large sources of water have appeared. And where there are many caves and waterfalls, only that Giriraj Himalaya is capable of fighting with you. He can give you incomparable love.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)