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ramayan 4.11.10: राजन! उस समय महान् पराक्रमी और धर्मात्मा समुद्र ने उस काल-प्रेरित दैत्य से इस प्रकार कहा- 10॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.11.10 
तत: समुद्रो धर्मात्मा समुत्थाय महाबल:।
अब्रवीद् वचनं राजन्नसुरं कालचोदितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस समय महान् पराक्रमी और धर्मात्मा समुद्र ने उस काल-प्रेरित दैत्य से इस प्रकार कहा- 10॥
 
King! At that time, the great, powerful and righteous Samudra spoke to that time-inspired demon in this manner - 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)