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ramayan 4.11.1: श्री रामजी के हर्षित और पुरुषार्थ को बढ़ाने वाले वचन सुनकर सुग्रीव ने उनके प्रति आदर प्रकट किया और श्री रघुनाथजी की इस प्रकार स्तुति की॥1॥   |   ramayan सर्ग 4.11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 11: वाली का दुन्दुभि दैत्य को मारकर उसकी लाश को मतङ्ग वन में फेंकना, मतङ्गमुनि का वाली को शाप देना, सुग्रीव का राम से साल-भेदन के लिये आग्रह करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.11.1 
रामस्य वचनं श्रुत्वा हर्षपौरुषवर्धनम्।
सुग्रीव: पूजयांचक्रे राघवं प्रशशंस च॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी के हर्षित और पुरुषार्थ को बढ़ाने वाले वचन सुनकर सुग्रीव ने उनके प्रति आदर प्रकट किया और श्री रघुनाथजी की इस प्रकार स्तुति की॥1॥
 
Hearing the words of Shri Rama, which were joyous and increased manliness, Sugreeva expressed his respect for him and praised Shri Raghunath in the following manner:॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)