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ramayan 4.10.9-10h: हे सज्जन! शत्रुसूदन! आप मुझ पर क्रोध न करें। हे राजन्! मैं सिर झुकाकर और हाथ जोड़कर यही प्रार्थना करता हूँ।॥9 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  4.10.9-10h 
मा च रोषं कृथा: सौम्य मम शत्रुनिषूदन॥ ९॥
याचे त्वां शिरसा राजन् मया बद्धोऽयमञ्जलि:।
 
 
अनुवाद
हे सज्जन! शत्रुसूदन! आप मुझ पर क्रोध न करें। हे राजन्! मैं सिर झुकाकर और हाथ जोड़कर यही प्रार्थना करता हूँ।॥9 1/2॥
 
‘‘Gentle! Shatrusudan! Please do not be angry with me. ‘King! I pray for this with my head bowed and hands folded.॥ 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)