Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.10.7-8h: "आप यहाँ के माननीय राजा हैं और मैं पहले की तरह सदैव आपका सेवक हूँ। आपके अलग होने के कारण ही मुझे राजा के पद पर नियुक्त किया गया है।" | ramayan सर्ग 4.10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वमेव राजा मानार्ह: सदा चाहं यथा पुरा॥ ७॥
राजभावे नियोगोऽयं मम त्वद्विरहात् कृत:।
अनुवाद
"आप यहाँ के माननीय राजा हैं और मैं पहले की तरह सदैव आपका सेवक हूँ। आपके अलग होने के कारण ही मुझे राजा के पद पर नियुक्त किया गया है।"
"You are the honorable king here and I am always your servant as before. It is because of your separation that I was appointed to the position of king. 7 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥