Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.10.6-7h: मुझे यहाँ अकेला दुःखी होकर लौटता देख नगरवासियों और मंत्रियों ने मेरा राजा के रूप में अभिषेक किया है। मैंने स्वेच्छा से यह राजपद स्वीकार नहीं किया है। अतः अज्ञानवश हुए इस पाप के लिए कृपया मुझे क्षमा करें। | ramayan सर्ग 4.10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मुझे यहाँ अकेला दुःखी होकर लौटता देख नगरवासियों और मंत्रियों ने मेरा राजा के रूप में अभिषेक किया है। मैंने स्वेच्छा से यह राजपद स्वीकार नहीं किया है। अतः अज्ञानवश हुए इस पाप के लिए कृपया मुझे क्षमा करें।
"Seeing me returning here alone in sadness, the people of the city and the ministers anointed me as the king. I have not accepted this kingship willingly. So please forgive me for this sin committed due to ignorance. 6 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥