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ramayan 4.10.33: जब तक मैं अपने सामने उस बंदर को न देख लूं जिसने आपकी पत्नी का अपहरण किया है, तब तक उस पापी और नैतिक आचरण को कलंकित करने वाले मनुष्य को यह जीवन धारण करना चाहिए।' 33   |   ramayan सर्ग 4.10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  4.10.33 
यावत् तं नहि पश्येयं तव भार्यापहारिणम्।
तावत् स जीवेत् पापात्मा वाली चारित्रदूषक:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जब तक मैं अपने सामने उस बंदर को न देख लूं जिसने आपकी पत्नी का अपहरण किया है, तब तक उस पापी और नैतिक आचरण को कलंकित करने वाले मनुष्य को यह जीवन धारण करना चाहिए।' 33
 
Until I see in front of me the monkey who has kidnapped your wife, that sinful person who has tarnished moral conduct should take up this life.' 33
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)