श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  4.10.32 
अमोघा: सूर्यसंकाशा निशिता मे शरा इमे।
तस्मिन् वालिनि दुर्वृत्ते पतिष्यन्ति रुषान्विता:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे मित्र! मेरे ये तीखे बाण सूर्य के समान तेजस्वी हैं, अचूक हैं; ये दुष्ट पर क्रोधपूर्वक गिरेंगे।
 
Friend! These sharp arrows of mine, as radiant as the Sun, are infallible; they will fall angrily upon the wicked one.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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