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श्लोक 4.10.30  |
वालिनश्च भयात् तस्य सर्वलोकभयापह।
कर्तुमर्हसि मे वीर प्रसादं तस्य निग्रहात्॥ ३०॥ |
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| अनुवाद |
| वीरवर! आप सम्पूर्ण जगत् का भय दूर करने वाले हैं। मुझ पर दया कीजिए और बालि का दमन करके उसके भय से मेरी रक्षा कीजिए।॥30॥ |
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| Viraavar! You are the one who removes the fear of the entire world. Please have mercy on me and save me from the fear of Vali by suppressing her.'॥ 30॥ |
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