श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.10.30 
वालिनश्च भयात् तस्य सर्वलोकभयापह।
कर्तुमर्हसि मे वीर प्रसादं तस्य निग्रहात्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वीरवर! आप सम्पूर्ण जगत् का भय दूर करने वाले हैं। मुझ पर दया कीजिए और बालि का दमन करके उसके भय से मेरी रक्षा कीजिए।॥30॥
 
Viraavar! You are the one who removes the fear of the entire world. Please have mercy on me and save me from the fear of Vali by suppressing her.'॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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