Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.10.29: 'रघुनाथजी! यह मेरे और बालि के बीच हुए वैर का विस्तृत वृत्तांत है। यह सब मैंने आपसे कहा है। देखिए, मुझे बिना किसी दोष के ही ये सब कष्ट भोगने पड़ रहे हैं॥ 29॥ | ramayan सर्ग 4.10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'रघुनाथजी! यह मेरे और बालि के बीच हुए वैर का विस्तृत वृत्तांत है। यह सब मैंने आपसे कहा है। देखिए, मुझे बिना किसी दोष के ही ये सब कष्ट भोगने पड़ रहे हैं॥ 29॥
‘Raghunaathji! This is the detailed story of my enmity with Vali. I have told you all this. See, I have to suffer all these troubles without any fault of mine.॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥