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ramayan 4.10.25: "यह सुग्रीव इतना क्रूर और निर्दयी है कि उसने भाईचारे का प्यार भूलकर पूरे राज्य पर कब्जा करने के लिए मुझे उस गुफा में बंद कर दिया।"   |   ramayan सर्ग 4.10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.10.25 
तत्रानेनास्मि संरुद्धो राज्यं मृगयताऽऽत्मन:।
सुग्रीवेण नृशंसेन विस्मृत्य भ्रातृसौहृदम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
"यह सुग्रीव इतना क्रूर और निर्दयी है कि उसने भाईचारे का प्यार भूलकर पूरे राज्य पर कब्जा करने के लिए मुझे उस गुफा में बंद कर दिया।"
 
“This Sugreeva is so cruel and ruthless that he forgot brotherly love and locked me inside that cave to take over the entire kingdom.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)