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श्लोक  4.10.24 
पादप्रहारैस्तु मया बहुभि: परिपातितम्।
ततोऽहं तेन निष्क्रम्य पथा पुरमुपागत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
"मैंने पत्थर को बार-बार लात मारी और किसी तरह उसे पीछे धकेल दिया। इसके बाद मैं गुफा से बाहर आया और यहाँ का रास्ता पकड़कर इस शहर में वापस आ गया। 24.
 
"I kicked the stone repeatedly and somehow pushed it back. After this, I came out of the cave and took the path here and returned to this city. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)