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ramayan 4.10.23: "मैंने बार-बार पुकारा, 'सुग्रीव! सुग्रीव!' लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला। इससे मुझे बहुत दुःख हुआ।   |   ramayan सर्ग 4.10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.10.23 
विक्रोशमानस्य तु मे सुग्रीवेति पुन: पुन:।
यत: प्रतिवचो नास्ति ततोऽहं भृशदु:खित:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
"मैंने बार-बार पुकारा, 'सुग्रीव! सुग्रीव!' लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला। इससे मुझे बहुत दुःख हुआ।
 
"I called out repeatedly, 'Sugreeva! Sugreeva!' but received no reply. This saddened me greatly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)