श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.10.21 
तस्यास्यात्तु प्रवृत्तेन रुधिरौघेण तद‍‍्बिलम्।
पूर्णमासीद् दुराक्रामं स्तनतस्तस्य भूतले॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उसके मुख और वक्षस्थल से रक्त इतनी मात्रा में भूमि पर बहने लगा कि वह सम्पूर्ण दुर्गम गुफा भर गई ॥21॥
 
"Blood started flowing from his mouth and chest on the ground in such a quantity that the entire inaccessible cave got filled. ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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