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ramayan 4.10.20: "इसके बाद मैंने उस भयानक शत्रु को देखा। इतने दिनों तक उससे न मिलने के कारण मुझे कोई दुःख या पीड़ा नहीं हुई। मैंने तुरन्त ही उसे उसके सभी सम्बन्धियों सहित मार डाला।"   |   ramayan सर्ग 4.10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.10.20 
स तु दृष्टो मया शत्रुरनिर्वेदाद् भयावह:।
निहतश्च मया सद्य: स सर्वै: सह बन्धुभि:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
"इसके बाद मैंने उस भयानक शत्रु को देखा। इतने दिनों तक उससे न मिलने के कारण मुझे कोई दुःख या पीड़ा नहीं हुई। मैंने तुरन्त ही उसे उसके सभी सम्बन्धियों सहित मार डाला।"
 
"After this I saw that dreadful enemy. I did not feel any pain or sadness due to not meeting him for so many days. I immediately put him to death along with all his relatives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)