श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.10.17 
तं प्रविष्टं विदित्वा तु सुघोरं सुमहद‍‍्बिलम्।
अयमुक्तोऽथ मे भ्राता मया तु क्रूरदर्शन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
"उस अत्यन्त भयानक और विशाल गुफा में राक्षस को प्रवेश करते हुए जानकर मैंने अपने क्रूर भाई से कहा-॥17॥
 
"Knowing that the demon had entered that extremely dreadful and huge cave, I said to my cruel brother -॥ 17॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd