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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  4.10.11-12h 
स्निग्धमेवं ब्रुवाणं मां स विनिर्भर्त्स्य वानर:॥ ११॥
धिक्त्वामिति च मामुक्त्वा बहु तत्तदुवाच ह।
 
 
अनुवाद
मैंने ये सब बातें बड़े प्यार से कही थीं, लेकिन उस बंदर ने मुझे डाँटते हुए कहा- ‘शर्म आनी चाहिए।’ यह कहने के बाद उसने मुझसे और भी कई कठोर बातें कहीं।
 
I had said all these things with great love, but that monkey scolded me and said- 'Shame on you'. After saying this, he said many more harsh things to me. 11 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)