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ramayan 4.10.10-11h: "मंत्रियों और नगरवासियों ने मुझे बलपूर्वक इस सिंहासन पर बैठाया है। वह भी इसलिए कि शत्रु राजाविहीन राज्य को देखकर उसे जीतने की इच्छा से आक्रमण करें।"॥10 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 10: भाई के साथ वैर का कारण बताने के प्रसङ्ग में सुग्रीव का वाली को मनाने और वाली द्वारा अपने निष्कासित होने का वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  4.10.10-11h 
बलादस्मिन् समागम्य मन्त्रिभि: पुरवासिभि:॥ १०॥
राजभावे नियुक्तोऽहं शून्यदेशजिगीषया।
 
 
अनुवाद
"मंत्रियों और नगरवासियों ने मुझे बलपूर्वक इस सिंहासन पर बैठाया है। वह भी इसलिए कि शत्रु राजाविहीन राज्य को देखकर उसे जीतने की इच्छा से आक्रमण करें।"॥10 1/2॥
 
"The ministers and the people of the city have forcibly made me sit on this throne. That too so that the enemy, seeing the kingdom without a king, may attack it with the desire to conquer it."॥10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)