Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.1.89: अपने आप गिरे हुए फूलों के गुच्छों से ढकी हुई धरती इतनी सुखदायक हो गई है, मानो उस पर सोने के लिए मुलायम बिस्तर बिछा दिए गए हों। 89.   |   ramayan सर्ग 4.1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  4.1.89 
इयं कुसुमसंघातैरुपस्तीर्णा सुखाकृता।
स्वयं निपतितैर्भूमि: शयनप्रस्तरैरिव॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
अपने आप गिरे हुए फूलों के गुच्छों से ढकी हुई धरती इतनी सुखदायक हो गई है, मानो उस पर सोने के लिए मुलायम बिस्तर बिछा दिए गए हों। 89.
 
The ground, covered with bunches of flowers that have fallen on their own, has become so soothing, as if soft beds have been spread on it for sleeping. 89.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)