Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.1.54: जो वायु मुझे पहले जानकीजी के साथ रहने पर सुखदायी लगती थी, वही आज सीताजी के वियोग में मेरे लिए दुःखदायी हो गई है ॥ 54॥ | ramayan सर्ग 4.1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सदा सुखमहं मन्ये यं पुरा सह सीतया।
मारुत: स विना सीतां शोकसंजननो मम॥ ५४॥
अनुवाद
जो वायु मुझे पहले जानकीजी के साथ रहने पर सुखदायी लगती थी, वही आज सीताजी के वियोग में मेरे लिए दुःखदायी हो गई है ॥ 54॥
The same air which used to seem pleasant to me earlier when I was in the company of Janaki, has today become sorrowful for me due to the separation from Sita. ॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥