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ramayan 4.1.46: ये पक्षीगण हर्ष से भरे हुए, इच्छानुसार कलरव करते हुए, मानो एक दूसरे को बुला रहे हों, मेरे हृदय में प्रेम का उन्माद उत्पन्न कर रहे हैं॥ 46॥   |   ramayan सर्ग 4.1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  4.1.46 
नदन्ति कामं शकुना मुदिता: सङ्घश: कलम्।
आह्वयन्त इवान्योन्यं कामोन्मादकरा मम॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
ये पक्षीगण हर्ष से भरे हुए, इच्छानुसार कलरव करते हुए, मानो एक दूसरे को बुला रहे हों, मेरे हृदय में प्रेम का उन्माद उत्पन्न कर रहे हैं॥ 46॥
 
‘These flocks of birds filled with joy, chirping as they wish, as if calling one another, create a frenzy of love in my heart.॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)