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ramayan 4.1.33-34h: मैं अपनी प्रिय पत्नी को नहीं देख पा रहा हूँ और इन सुन्दर वृक्षों को देख रहा हूँ, इसलिए मेरी वेदना का ज्वर और भी बढ़ जायेगा।   |   ramayan सर्ग 4.1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  4.1.33-34h 
अपश्यतस्तां वनितां पश्यतो रुचिरान् द्रुमान्॥ ३३॥
ममायमात्मप्रभवो भूयस्त्वमुपयास्यति।
 
 
अनुवाद
मैं अपनी प्रिय पत्नी को नहीं देख पा रहा हूँ और इन सुन्दर वृक्षों को देख रहा हूँ, इसलिए मेरी वेदना का ज्वर और भी बढ़ जायेगा।
 
I am not able to see my beloved wife and I am looking at these beautiful trees, so my fever of anguish will increase even more. 33 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)