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ramayan 4.1.26: ‘देखो! ऐसे विचित्र पक्षी नाना प्रकार की भाषा बोलते हुए चारों ओर वृक्षों, झाड़ियों और लताओं की ओर उड़ रहे हैं॥ 26॥   |   ramayan सर्ग 4.1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.1.26 
एवं विचित्रा: पतगा नानारावविराविण:।
वृक्षगुल्मलता: पश्य सम्पतन्ति समन्तत:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘देखो! ऐसे विचित्र पक्षी नाना प्रकार की भाषा बोलते हुए चारों ओर वृक्षों, झाड़ियों और लताओं की ओर उड़ रहे हैं॥ 26॥
 
‘Look! Such strange birds speaking in various languages ​​are flying all around towards the trees, bushes and creepers.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)