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ramayan 4.1.127: श्री रघुनाथजी के आगे-आगे जाकर, शांतचित्त लक्ष्मण उन्मत्त हाथी की भाँति मनोहर चाल से चलते हुए, अपने बल और धर्म से उनकी रक्षा करने लगे।   |   ramayan सर्ग 4.1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  4.1.127 
तं मत्तमातङ्गविलासगामी
गच्छन्तमव्यग्रमना महात्मा।
स लक्ष्मणो राघवमिष्टचेष्टो
ररक्ष धर्मेण बलेन चैव॥ १२७॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के आगे-आगे जाकर, शांतचित्त लक्ष्मण उन्मत्त हाथी की भाँति मनोहर चाल से चलते हुए, अपने बल और धर्म से उनकी रक्षा करने लगे।
 
Going ahead of Sri Raghunath, calm and composed Lakshmana, moving with the graceful gait of a mad elephant, began to protect him with his strength and religion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)