श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  4.1.123 
त्यजतां कामवृत्तत्वं शोकं संन्यस्य पृष्ठत:।
महात्मानं कृतात्मानमात्मानं नावबुध्यसे॥ १२३॥
 
 
अनुवाद
‘अपने शोक को त्याग दे और व्यभिचारी का सा आचरण छोड़ दे। तू महान् आत्मा है, पवित्रात्मा है, किन्तु इस समय तू अपने आपको भूल गया है – तुझे अपने वास्तविक स्वरूप का स्मरण नहीं है।’॥123॥
 
‘Leave behind your grief and give up behaving like a lecherous person. You are a great soul and a pure soul, but at this moment you have forgotten yourself – you are not remembering your true nature.’॥ 123॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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