vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना
»
श्लोक 107
श्लोक
4.1.107
या मामनुगता मन्दं पित्रा प्रस्थापितं वनम्।
सीता धर्मं समास्थाय क्व नु सा वर्तते प्रिया॥ १०७॥
अनुवाद
हाय! इस समय मेरी वह प्रियतमा कहाँ है, जो पिता के द्वारा वन में भेजे जाने पर धर्म की शरण लेकर मेरे पीछे-पीछे यहाँ आई थी?॥107॥
Alas! Where is my beloved at this time, who followed me here taking refuge in Dharma after being sent to the forest by her father?॥ 107॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×