श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  4.1.106 
किं नु वक्ष्यामि धर्मज्ञं राजानं सत्यवादिनम्।
जनकं पृष्टसीतं तं कुशलं जनसंसदि॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! जब धर्म को जानने वाले सत्यनिष्ठ राजा जनक भीड़ में बैठे हुए मुझसे सीता का कुशल-क्षेम पूछेंगे, तब मैं उन्हें क्या उत्तर दूँगा? ॥106॥
 
Lakshmana! When the truthful King Janaka, who knows the Dharma, will ask me about the well-being of Sita while sitting in the crowd, what answer will I give him then? ॥106॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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