Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.1.104: लक्ष्मण! वे लोग धन्य हैं जो अपने प्रियतम के साथ रहते हुए, कमल और सुगन्धित कमलों की सुगन्ध से प्रवाहित होने वाली पम्पा वन की शीतल, कोमल और शोकनाशक वायु का आनंद लेते हैं॥104॥   |   ramayan सर्ग 4.1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  4.1.104 
पद्मसौगन्धिकवहं शिवं शोकविनाशनम्।
धन्या लक्ष्मण सेवन्ते पम्पाया वनमारुतम्॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! वे लोग धन्य हैं जो अपने प्रियतम के साथ रहते हुए, कमल और सुगन्धित कमलों की सुगन्ध से प्रवाहित होने वाली पम्पा वन की शीतल, कोमल और शोकनाशक वायु का आनंद लेते हैं॥104॥
 
Lakshmana! Blessed are those who, while staying with their beloved, enjoy the cool, gentle and sorrow-relieving air of the Pampa forest, which flows with the fragrance of lotus and fragrant lotuses.॥ 104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)