Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.1.101: लक्ष्मण! देखो, ये मृग अपनी मृगियों के साथ पर्वत के विचित्र शिखरों पर विचरण कर रहे हैं और मैं मृगरूपी सीता से विमुख हूँ। ये मृग इधर-उधर विचरण करते हुए मेरे मन को व्याकुल कर रहे हैं॥101॥ | ramayan सर्ग 4.1: पम्पासरोवर के दर्शन से श्रीराम की व्याकुलता, दोनों भाइयों को ऋष्यमूक की ओर आते देख सुग्रीव तथा अन्य वानरों का भयभीत होना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लक्ष्मण! देखो, ये मृग अपनी मृगियों के साथ पर्वत के विचित्र शिखरों पर विचरण कर रहे हैं और मैं मृगरूपी सीता से विमुख हूँ। ये मृग इधर-उधर विचरण करते हुए मेरे मन को व्याकुल कर रहे हैं॥101॥
Lakshmana! Look, these deer are roaming around with their female deers on the strange peaks of the mountain and I am separated from doe-eyed Sita. These deer roaming here and there keep troubling my mind.॥ 101॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥