Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.9.2: आर्यपुत्र! यद्यपि तुम महापुरुष हो, तथापि सूक्ष्म रूप से विचार करने पर पाप में लिप्त हो रहे हो। जब तुम विषयासक्तियों से पूर्णतः मुक्त हो जाओगे, तब तुम यहाँ भी इस पाप से बच सकते हो॥ 2॥ | ramayan सर्ग 3.9: सीता का श्रीराम से निरपराध प्राणियों को न मारने और अहिंसा-धर्म का पालन करने के लिये अनुरोध । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आर्यपुत्र! यद्यपि तुम महापुरुष हो, तथापि सूक्ष्म रूप से विचार करने पर पाप में लिप्त हो रहे हो। जब तुम विषयासक्तियों से पूर्णतः मुक्त हो जाओगे, तब तुम यहाँ भी इस पाप से बच सकते हो॥ 2॥
'Aryaputra! Although you are a great man, yet on thinking in a very subtle way you are getting involved in sin. When you are completely free from lustful addictions, then you can save yourself from this sin here also.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥