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ramayan 3.75.9-10h: ऐसी बातें कहकर सुमित्राकुमार लक्ष्मण ने वीर श्री राम से कहा - 'भैया! हम दोनों को शीघ्र ही वहाँ चलना चाहिए। मेरा मन भी चलने के लिए व्याकुल हो रहा है। 9 1/2॥   |   ramayan सर्ग 3.75: श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत तथा उन दोनों भाइयों का पम्पासरोवर के तट पर जाना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 75: श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत तथा उन दोनों भाइयों का पम्पासरोवर के तट पर जाना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  3.75.9-10h 
इति ब्रुवाणं तं वीरं सौमित्रिरिदमब्रवीत्॥ ९॥
गच्छावस्त्वरितं तत्र ममापि त्वरते मन:।
 
 
अनुवाद
ऐसी बातें कहकर सुमित्राकुमार लक्ष्मण ने वीर श्री राम से कहा - 'भैया! हम दोनों को शीघ्र ही वहाँ चलना चाहिए। मेरा मन भी चलने के लिए व्याकुल हो रहा है। 9 1/2॥
 
Saying such things, Sumitra Kumar Lakshmana said to Veer Shri Ram - 'Brother! We both should go there soon. My mind is also getting anxious to move. 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)